२१/४/१२

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मीरा के ऩद - Meera Ke Pad दरद न जाण्ाां को् हेयी महहॊ दयदे ददवहणी महहयहॊ दयद न जहणमहॊ कोम। घहमर यी गत घहइर जहणमहॊ, दहवडो अगण सॊजोम। जौहय की गत जौहयी जहणै, क्मह जहणमहॊ जजण खोम। दयद की भहमहां दय दय डोलमहॊ फैद मभलमह नदहॊ कोम। भीयह यी प्रबु ऩीय मभटहॊगहॊ जफ फैद सहॊवयो होम॥ # अब तो हरर नाम लौ लागी सफ जग को मह भहखनचोय, नहभ धमो फैयहगी। कहॊ छोडी वह भोहन भुयरी, कहॊ छोडड सफ गोऩी। भ ॊड भुॊडहई डोयी कहॊ फहॊधी, भहथे भोहन टोऩी। भहतु जसुभतत भहखन कहयन, फहॊध्मो जहको ऩहॊव। स्महभ ककशोय बमे नव गोयह, चैतन्म तहॊको नहॊव। ऩीतहमफय को बहव ददखहवै, कदट कोऩीन कसै। दहस बक्त की दहसी भीयह, यसनह कृष्ण यटे॥ # राम रतन धन ऩा्ो ऩहमो जी महे तो यहभयतन धन ऩहमो। फस्तु अभोरक दी महहये सतगुरु, ककयऩह को अऩणहमो। जनभ जनभ की ऩ ॉजी ऩहई, जग भें सबी खोवहमो। खयचै नदहॊ कोई चोय न रेवै, ददन-ददन फढत सवहमो। सत की नहव खेवदहमह सतगुरु, बवसहगय तय आमो। भीयह के प्रबु गगयधयनहगय, हयख-हयख जस ऩहमो॥ # Copy right for deeprahul हरर बबन कछू न सुहावै ऩयभ सनेही यहभ की नीतत ओर ॊयी आवै। यहभ महहये हभ हैं यहभ के, हरय बफन कछ न सुहहवै। आवण कह गए अजहुॊ न आमे, जजवडह अतत उकरहवै। तुभ दयसण की आस यभैमह, कफ हरय दयस ददरहवै। चयण कॊवर की रगतन रगी तनत, बफन दयसण दुख ऩहवै। भीयह क ॊ प्रबु दयसण दीज्मौ, आॊणद फयणम ॊ न जहवै॥ # झूठी जगमग जोतत आवो सहेलमह यरी कयहॊ हे, ऩय घय गहवण तनवहरय। झ ठह भहणणक भोततमह यी, झ ठी जगभग जोतत। झ ठह सफ आब षण यी, सहॊगच पऩमहजी यी ऩोतत। झ ठह ऩहट ऩटॊफयहये, झ ठह ददखणी चीय। सहॊची पऩमहजी यी ग दडी, जहभे तनयभर यहे सयीय। छप्ऩ बोग फुहहई दे है, इन बोगगन भें दहग। र ण अर णो ही बरो है, अऩणो पऩमहजी को सहग। देणख बफयहणै तनवहॊण क ॊ हे, क्म ॊ उऩजहवै खीज। कहरय अऩणो ही बरो है, जहभें तनऩजै चीज। छैर बफयहणे रहख को हे अऩणे कहज न होइ। तहके सॊग सीधहयतहॊ हे, बरह न कहसी कोइ। वय हीणों आऩणों बरो हे, कोढी कुजष्ट कोइ। जहके सॊग सीधहयतहॊ है, बरह कहै सफ रोइ। अबफनहसी स ॊ फहरवहॊ हे, जजऩस ॊ सहॊची प्रीत। भीयह क ॊ प्रबु मभलमह हे, ऐदह बगतत की यीत॥ # अब तो मेरा राम
भहतह छोडी पऩतह छोडे छोडे सगह बहई। सहधु सॊग फैठ फैठ रोक रहज खोई॥ सतॊ देख दौड आई
अफ तो भेयह यहभ नहभ द सयह न कोई॥ Copy right for deeprahul , जगत देख योई। प्रेभ आॊसु डहय डहय, अभय फेर फोई॥ भहयग भें तहयग मभरे, सॊत यहभ दोई। सॊत सदह शीश यहख ॊ, यहभ हृदम होई॥ अॊत भें से तॊत कहढमो, ऩीछे यही सोई। यहणे बेज्मह पवष कह प्महरह, ऩीवत भस्त होई॥ अफ तो फहत पैर गई, जहनै सफ कोई। दहस भीयह रहर गगयधय, होनी हो सो होई॥ # म्हारे तो गगरधर गोऩाल महहये तो गगयधय गोऩहर द सयो न कोई॥ जहके मसय भोय भुगट भेयो ऩतत सोई। तहत भहत भ्रहत फॊधु आऩनो न कोई॥ छहॉडड दई कुद्दकक कहतन कहह करयहै कोई॥ सॊतन दढग फैदठ फैदठ रोकरहज खोई॥ चुनयीके ककमे ट क ओढ रीन्हीॊ रोई। भोती भ ॉगे उतहय फनभहरह ऩोई॥ अॊसुवन ज सीॊगच सीॊगच प्रेभ फेमर फोई। अफ तो फेर पैर गई आणॉद पर होई॥ बगतत देणख यहजी हुई जगत देणख योई। दहसी भीयह रहर गगयधय तहयो अफ भोही॥

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